दिन ऐसे ही निकलने लगे और माँ भी थोड़ा उदास सी रहने लगी। क्या करे, उन्हें लंड ही नहीं मिला था इतने दिनों से !
मुझसे माँ की यह बेचैनी देखी नहीं जा रही थी पर मैं उनसे कह भी तो नहीं सकता था। मैंने उनसे पूछा- माँ, इतनी उदास क्यों रहती हो तुम आजकल?
तो वो बोली- कुछ नहीं बेटा, तेरे पापा की बहुत याद आ रही है, इतनी दिन हो गए न !
तो मैंने कहा- माँ मैं हूँ न पापा की जगह ! बोलो क्या हुआ ?
तो वो बोली- तू क्या जाने एक औरत की मज़बूरी ! तू तो अभी बच्चा है।