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उमेश ठीक से छोड़ नही पाया था, बस ऊपर से छूट को रग़ाद कर चला गया था पैर मैं जान गयी थी की छुड़ाई मैं अनोखा मज़ा है. उसके जाने पैर मैने चड्डी पहन ली थी. . मैं सोच रही थी की जब उमेश के छ्होटे लंड से इतना मज़ा आया है तू जब पापा अपना मोटा तगड़ा ठड पेलेंगे तू कितना मज़ा आएगा. उमेश के जाने के 6-7 मिनिट बाद ही पापा स्टेशन से वापस आ गाये.

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