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इस काम के लिये मैंने सबसे पहले गाँव के प्रधान को अपने कब्जे में लेना उचित समझा। इसलिये मैं नियमित सुबह-शाम गाँवों में प्रधान जी के पास जाकर बैठने लगा। जब उन्हें पता चला कि गाँव में महिलाओं की पढ़ाई के लिये अभियान चलाना चाहता हूँ तो उन्होंने मुझे सहयोग करने का पूरा आश्वासन दिया। वो मुझसे इस बात से भी प्रभावित हुए कि मैं अच्छे परिवार से सम्बन्ध रखता हूँ और इतनी कम उम्र में भी इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाने के कोशिश कर रहा था।

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