About:

और ज्यादातर दोपहर का खाना भी उनके साथ उनके घर के बने दही और छाछ के साथ करता। इससे उन लोगों को मैं बिल्कुल भी गाँव के बाहर का रहने वाला न लगता। अब मेरी नजरों में धीरे-धीरे कुछ गाँवों की सुन्दर लड़कियाँ चढ़ने लगी थी और मैं उन्हें चोदने की योजना बनाने लगा। इसके लिये मैंने अपनी महिला कार्यकर्ताओं से ही उन्हें अपने साथ लगाने को कहा।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*