उस रात मुझे नींद नहीं आई क्योंकि अगले दिन एक नई कुंवारी चूत चुदने के लिये मेरा इन्तजार कर रही थी। अब मैं दोपहर का इन्तजार करने लगा। दोपहर बाद जब सब खाना खाने के लिये जाने लगे तो मैंने उसे छेड़ने के लिये कहा- तुम्हें कुछ याद है नीतू?
उसने कहा- क्या सर?
मैंने कहा- कल तुमने मुझे कुछ देने के लिये कहा था !
तो उसने नादान बनते हुये मुझे छेड़ते हुए कहने लगी- मुझे तो कुछ भी याद नहीं है ! और फिर रात गई बात गई।