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इसलिये मैंने उसे घर जाने के लिये कह दिया। उसके जाते ही मैंने चैन की सांस ली। चलो मामला कहीं से भी नहीं बिगड़ा वरना मजे के चक्कर में मैंने इधर-उधर देखा भी नहीं कि कहीं कोई हमे देख तो नहीं रहा। लेकिन जैसे ही मैं लेट रहा था कि पंचायत घर के पीछे वाले घर में रहने वाली कजरी नामक की एक औरत आ गई। वैसे तो मैं उसे आंटी ही कहता था लेकिन मुझे पता नहीं था कि उसकी नीयत मुझ पर पहले से ही खराब थी।

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