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. . . मैंने मैडम की चूत साफ़ करने की कोशिश तो उन्होंने हट जाने को कहा और कहा- मैं कर लूँगी ! मुझे अपना रुमाल दे दो !

इसी बीच उन्होंने अपना खून निकलते हुए देख लिया और फिर रोने लगी, रोते-रोते वो कहने लगी- आदी, यह तो होना ही था ! आज नहीं तो कभी न कभी मेरा शील भंग होता ही . . . . उसके बाद उन्होंने डेस्क साफ़ किए और मैंने उन्हें वापिस सही जगह रखने में उनकी मदद की।

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