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मैंने उसके हाथ को चूमा। वो खुश हो गई जैसे उसे कुछ मिल गया हो- तुम नाराज तो नहीं हो? उसने पूछा। मैंने मना कर दिया और बोला- जिसमें मेरी जान खुश है उसी में मैं खुश हूँ। वो बहुत खुश हुई, फिर से पहले की तरह मुस्कराने लगी। मैंने कहा- अब तुम जाओ, काफी देर हो गई है। वो बोली- मन तो नहीं कर रहा !

मैं बोला- न जाओ तो अच्छा है।

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