मुझे अब ग़लत या सही का कोई होश नहीं रह गया था. मैने सोचा
अगर मैं इस पागल से छुड़वा लून तो मुझे कोई कुच्छ भी नहीं कह सकेगा. अगर मुझसे कोई कुच्छ कहेगा
तो कह दूँगी की इस पागल ने मेरे साथ ज़बरदस्ती किया है. मैने सोच लिया की आज मैं इस पागल से छुड़वा
कर रहूंगी भले ही मेरी छूट का हाल कुच्छ भी हो. मैं उस पागल का हाथ पकड़ कर घर के अंदर ले गयी.