उसने ये भी
लिखा था की वो 12 तक पढ़ा लिखा है. उसकी कहानी पढ़ने के बाद मुझे मोहन से नफ़रत होने लगी. मैने मान
ही मान सोच लिया की अब मुझे मोहन के साथ नहीं रहना है. मैं मान ही मान राजेश से बहुत ज़्यादा प्यार
करने लगी. मैने सोच लिया की राजेश भले ही गूंगा है, मैं उसी को अपना जीवन साथी बना कर उस के साथ
अपनी सारी ज़िंदगी गुजर दूँगी.