नही अब रत को, अब जाओ. मान मार कर मैने कपड़े
पहने ओर घर आ गया. पर मेरा मान किसी काम मे नही लग रहा था. बार-बार भाभी का शरीर आखों के सामने आ रहा था. मान कर रहा
था की भाभी के पास वापस चला जाओं. पार वो घर पर नही थी. अपनी किसी सहेली के घर गयी हुई थी. पूरा दिन उनके इंतेज़ार मई ही
कटा. सुबह को ही मैने मों से कह दिया था था की भाभी की तबीयत
क्योंकि अभी पूरी तरह से ठीक नही है इसलिए आज भी उनका खाना
यही बना लेना मई ले जाऊँगा.