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हमारे होंठ किस में जुटे हुए थे। बंद होंठ से ही मैने उसके कोमल होंठ रगड़े। मुँह खोल मैने उसके होंठ मेरे होंठ भींच लिए और जीभ से चाटे। फूल की पंखुड़ी जैसे कोमल उसके होंठ मुझे इतने मीठे लगे कि मेरा लंड अकड़ने लगा। जीभ से मैने होंठ टटोले तब वो फिर छटपटा गयी मैने कहा : मुँह खोल तो ज़रा। थोड़ी हिचकिचाहट के बाद उसने मुँह खोला।

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