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शायद उसे भी ठण्ड के मारे कंपकंपी सी छूट रही थी। “दीदी, चलो अन्दर चलें. . . ” वो जल्दी से खड़ा हो गया और मेरा भारी बदन उसने अपनी बाहों में उठा लिया। उसने जवान वासना भरे शरीर में अभी गजब की ताकत आ गई थी। “अरे रे . . . गिरायेगा क्या. . . चल उतार मुझे. . . ” मैं घबरा सी गई। उसने धीरे से मुझे उतार दिया और दीवार फ़ांद गया।

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