”
“वाह रे मेरे शरिफ बेटे, मां को घुर-घुर के देखेगा, मां को नंगा कर देगा और उसकी चुदाई और चुसाई करेगा, मगर उसके सामने गाली नही देगा। बडी कमाल की शराफत है, तेरी तो। ”
“क्या मां, इस बात को गालीयों से क्यों जोड के देखती हो ?”
“अरे क्यों ना देखुं, जब हमारे बीच शरम की सारी दिवारें टूट गई है और हम एक दुसरे के नंगे अंगो से खेल रहे है, तब ये शराफत का धोंग करने का क्या फायदा,,,,,,।