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बुढीया की छाती पहाड जैसी है। ”
कह कर मां हसने लगती। फिर मेरे से बोलती,
“तु सबके ब्लाउस की लंबाई-चौडाई देखता रहता है, क्या ? या फिर ईस्त्री करता है। ”

मैं क्या बोलता, चुप-चाप सिर झुका कर ईस्त्री करते हुए धीरे से बोलता,
“अरे, देखता कौन है ?, नजर चली जाती है, बस। ”

ईस्त्री करते-करते मेरा पुरा बदन पसीने से नहा जाता था।

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