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मैं केवल लुन्गी पहने ईस्त्री कर रहा होता था। मां मुझे पसीने से नहाये हुए देख कर बोलती,
“छोड अब तु कुछ आराम कर ले, तब तक मैं ईस्त्री करती हुं. ”

मां ये काम करने लगती। थोडी ही देर में उसके माथे से भी पसीना चुने लगता और वो अपनी साडी खोल कर एक ओर फेंक देती और बोलती,
“बडी गरमी है रे, पता नही तु कैसे कर लेता है, इतने कपडो की ईस्त्री,,? मेरे से तो ये गरमी बरदास्त नही होती।

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