”
थोडी देर में, जब मैं वापस आया तो देखा की बापु भी उठ चुका था और वो बाथरुम जाने की तैयारी में था। मैं भी अपने काम में लग गया और सारे कपडों के गठर बना के तैयार कर दीया। थोडी देर में हम सब लोग तैयार हो गये। घर को ताला लगाने के बाद बापु बस पकडने के लिये चल दीया और हम दोनो नदी की ओर। मैने मां से पुछा की बापु कब तक आयेन्गे तो वो बोली,
“क्या पता, कब आयेगा? मुझे तो बोला है की कल आ जाउन्गा पर कोइ भरोसा है, तेरे बापु का ?, चार दिन भी लगा देगा।