मेरा भी मसल रहा था, और उधर अपना भी मसल रहा था। ”
फिर मां उठ कर सीधा खडी हो गई और बोली,
“अभी आती हुं। “,
कह कर मुस्कुराते हुए झाडियों कि तरफ बढ गई। झाडियों के पीछे से आ के, फिर अपने चुतडों को जमीन पर सटाये हुए ही, थोडा आगे सरकते हुए मेरे पास आई। उसके सरक कर आगे आने से उसकी साडी थोडी-सी उपर हो गई, और उसका आंचल उसकी गोद में गीर गया।