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“हाँ लगता तो है,” जय को अब भी विशवास नही हो राहा था की वो ये घर छोड कर जा रहे हैं. थोडी देर बाद रिया की गाडी उस घर से दूर होने लगी. रिया ने अपना एक हाथ जय के हाथ पर रखा और उसे सैहलाने लगी. “जय जो भी होगा अच्छे के लिये होगा, मैं हूं ना तुम्हारे साथ. ”

उस रात राज ने दो बार रोमा के बिस्तर से निकलने की कोशिश की लेकिन रोमा की बाहें उसके बदन से ऐसे लिपटी थी की वो निकाल ना सका, अगर वो उसकी बाहों को हटाता तो रोमा की नींद खुल जाती जो वो नही चाहता था.

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