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“यार मैं तो थक गयी हूं” गीता ने शिकायत की. उसे पता था की उसकी कोयी अदा कोयी तरीका राज को अपनी तरफ़ आकर्शित करने में कामयाब नही हो पयेगी, “मेरी तो समझ में नही आ राहा की मैं क्या करूं. “”आओ याहां तालाब के किनारे बैठते हैं. ” रोमा ने काहा. तालाब के किनारे बैठते ही उसका ध्यान अपने २१ वर्शिये भाई राज पर आ टिका.

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