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जिन भावनाओं को वो छुपाते आयी थी आज वो रंग दिखाने लगी थी. उसके हाथ खुद ब खुद उसकी चुचियों पर जा पहुँचे और वो उन्हे मसलने लगाते हैं. उत्तेजना और प्यार की मादकता में उसके निप्पल तन कर खडे हो जाते हैं. कामुकता की आग में उसका बदन ऐंठने लगता है. दर्वाज़े पर थपथपाहट सुन उसका ध्यान भंग होता है. फिर जैसे ही वो दर्वाज़े को खुलता देखती है झट से अपना हाथ अपनी चुचियों से खीन्च लेती है.

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