About:

मैं अब्दुल के ऊपर सोई थी और रफ़ीक मेरी पीठ से चिपका हुआ था। “मेरी बानो. . . आज तू मुझे मिल गई. . . बस रोज मिला कर !” “तू तो है चूतिया एक नम्बर का. . . भोसड़ी के, मेरे तो पचास आशिक है. . . तू भी बस मेरा एक प्यारा आशिक है. . . बस चोद लिया कर. . . ज्यादा लार मत टपका. . . ! ” मैंने कपड़े पहनते हुये कहा। अब्दुल और खलील दोनों ही हंस दिये.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*