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आज ज़िन्दगी में पैहली बार किसी मर्द के लन्ड को उसने अपनी चूत में लिया था वो भी अपने प्यार का. आज वो दिन था जिसका उसने बर्सों से इन्तेज़ार किया था. अपनी आँखों से बहे नमकीन आंसुओं को अपनी जीभ से चाटते हुए वो राज के धक्कों का साथ देने लगी. अपनी कमर को उसके हर धक्के के साथ मिलाने लगी. राज के लन्ड की नसें तनने लगी थी और गोलियों में उबाल उठ राहा था.

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