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उत्तेजना और गरमाहट से उसका बदन भर राहा था. उसका मन तो कर राहा था की वो अपना हाथ अपनी चूत पर रख उसे रगडे और मसले पर वो किताब को और आगे पढना चाहती थी. अपने दिल के जज़बातों को रोक उसने अपना हाथ टौप से बाहर निकाला और किताब को एक बार फिर उठा लिया. . . . . . . . . मैं तुम्हे घुमा कर पीठ के बल लिटा देता हूं, तुम अपनी बिकीनी को अपने बूब्स के ऊपर कर लेती हो मुझे दिखाने के लिये.

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