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” पर राज था की उसके मुलायम और नाज़ुक बदन को अपनी बाहों से छोडना ही नही चाहता था, “रोमा पता है तुम्हारी इन बाहों में कितना सकून मिलता है मुझे, मन करता है की इसी तरह हमेशा पडा रहूं. ” रोमा शर्मा गयी, “अब उठ्ठो भी. . . . . . . ” वो उसकी बाहों से निकलने की कोशिश करने लगी. लेकिन राज की बाहें ज़्यादा मज़बूत थी.

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