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दोनो अलाव के सामने बैठ गये. जय ने अपनी जेब से वही नशे वाली सिग्रेट निकली और सुल्गा ली. सिग्रेट का जोर का कश लेकर उसने अपनी छाती धुएँ से भर ली फिर धुएँ को धीरे धीरे छोडने लगा. “राज मुझे रोमा बहुत पसन्द है,” उसने अपने फेंफडों में इकट्ठे धुएं को छोडते हुए काहा, “बहुत सुन्दर लगती है वो. ” “इतनी भी सुन्दर नही है वो,” राज ने उसकी सुन्दरता को कम आन्कते हुए काहा.

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