वो फच की आवाज करता हुआ अन्दर जाने लगा साथ ही मेरा बैलेंस भी बिगड़ गया और मैं लंड पर पूरा धच से बैठ गयी। मेरे मुंह से चीख निकल पड़ी, “हाय . . जीजू . . . मर गयी . . ”
कविता बोली – “हाँ . . . . मेरी रानी . . . अब लंड का पता चला है . . . ”
“बहुत मोटा है . . राम. . . जड़ से टकरा गया है . . ”
अंकित अब नीचे से चूतडों को हिला हिला कर चोद रहा था.