. मैंने अपना मुंह भींच लिया कि कहीं आवाज ना निकल जाए. उसने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. मेरी चूत में उसने उंगली घुसा दी. पर मुझे लगा कि उंगली मर्द की नहीं है. मैंने देखा तो वो कविता थी. वो मुझे देख कर प्यार से मुस्कराई . “मजा आ रहा है ना . . . . ”
” हाय . . . . कविता. . . . मैं मर जाऊंगी . .