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ऋतू और उसका हसबंड सामने वाली सिंहासन पर बैठे थे. कविता हमें देखते हुए मुस्कराई. मैं और अंकित भी मुस्करा दिए. “रात बहुत हो गयी है . . . अब चलना चाहिये. . . . . . . ” कविता बोली. ऋतू ने भी जाने को कह दिया. हम चारों यानि अंकित , मैं , कविता और बेबी बाहर आकर कार में बैठ गए. अंकित गाड़ी चला रहा था. कविता ने पूछा -“पार्टी एन्जॉय की या नहीं .

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