उसके सोये हुए लंड तक का आकार ऊपर से ही नजर आ रहा था. मैंने जान बूझ के सोफे पर ऐसे झुक के बैठी कि उसे मेरे बूब्स आसानी से दिख जायें. उसने भी मेरे बूब्स को देखने का लालच नहीं छोड़ा. मैंने उसे देखते हुए पकड़ लिया. मैं मुस्कराई. वो शरमा गया …
“जीजू क्या देख रहे थे …. . ”
“कुछ नहीं …. बस . . ”
“शरारती हो ….