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. . . और चाट कर साफ़ कर दिया. मैं अब बैठ गयी. उसने भी अपने कपड़े ठीक कर लिए. मैंने भी पजामे को ठीक करके नाडा बाँध लिया. ग्वालियर में बस पहुँच चुकी थी. बस की लाइट जल उठी. बस स्टैंड पर आ कर रुक गयी. कंडक्टर कह रहा था. “१५ मिनट का स्टाप है . . . . . नाश्ता कर लो . . . . . सभी अब अपने अपने स्लीपर पर चले जाए .

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