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जय रिया के चैहरे पर बदलते भावों को पढ रहा था और उसे लगा की आखिर रोमा ने अपनी खामोशी से उसे आगे बढने की इजाज़त दे दी है. मन ही मन में उसे पता था की रोमा नशे में है और वो उसका फ़ायदा उठा राहा है, पर रोमा को पाने की चाह के आगे वो कुच्छ सोच नही पा राहा था. उसने रोमा को अपनी और नज़दीक खींच लिया और उसके टौप के ऊपर से उसकी चुचियों को सैहलाने लगा.

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