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और फिर जय अपने किये पर पछता राहा था जिससे रिया का गुस्सा पिघल गया था. रिया आगे बढी और उसने अपने भाई को अपनी बाहों मे ले लिया. फिर उसके सर को अपने कन्धों पर रख उसे रोने दिया. वो हमेशा से ही मज़बूत इरादों की लडकी थी, और जब भी उसकी मा जय पर गुस्सा करती या उसे मारने आती तो वो हमेशा उसे इसी तरह अपने सीने से लगा बचा लेती थी.

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