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वो सीधी बात पर आ गयी, मुझे कुछ बोलना ही नहीं पड़ा। मैंने झट से कहा- मैं तुम्हें संतुष्ट कर सकता हूं यदि तुम चाहो तो !

पहले तो वो कुछ नहीं बोली, जब मैंने कहा कि चलो ठीक है, जाने दो! तो वो जोर से बोली- मुझे तो बहुत जरूरत है, रोज़ उंगली से काम चलाना पड़ता है, लेकिन कैसे और कब करें सब कुछ?

मैंने कहा- बहुत आसान काम है, अभी तुम्हारे पास कितना समय है?

वो बोली- पूरा दिन फ़्री हूं मैं तो !

मैंने कहा- चलो मेरे साथ ! मैं आज तुम्हें अच्छी तरह संतुष्ट करता हूं अपने ८” के लण्ड से।

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