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. . . बाययय
मैं मडगाँव, गोआ स्टेशन पर उतरी। ‘जो’ लपक कर मेरी बोगी के आगे आ गया और मेरा सामान सामने वाले रेस्टोरेन्ट पर रख दिया। फिर वहां से लपक कर दूसरी बोगी में गया और वहां से एक जोड़े को और ले कर आ गया। मैं उन्हें जानती थी, विक्रम जो का पुराना मित्र है और लता विक्रम की पत्नी। जो ने बताया कि उन्हें भी मैंने गोआ घूमने के लिये बुला लिया था

हम चारों स्टेशन से बाहर आ कर कार में बैठ गए।

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