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. . उसके धक्के धीरे-धीरे कम होते गये. . . जिससे मैं आराम से झड़ गयी. . . झड़ते हुए असीम संतुष्टि मिल रही थी। “हाय जो. . . पहले क्यों नही मिले तुम. . . कितनी शानदार चुदाई करते हो. . . ”

“नेहा. . . नींद में क्या बोले जा रही हो. . . सच में चुदने की इच्छा है. . . ?”

मैंने रुमाल चेहरे से हटा लिया। जो वहाँ खड़ा मुस्करा रहा था।

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