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. . . और अब लन्ड आसानी से अन्दर बाहर फ़िसलने लगा था। हम दोनो मुड़ कर एक दूसरे की आंखो में आंखे डाल कर प्यार से देख रहे थे . . . . उसके होंठ मेरे होंठों को बार बार चूम रहे थे। “नेहा दीदी. . . . आप कितनी अच्छी है. . . . हाय. . . . मुझे कितना मजा आ रहा है. . . . ” मुन्ना मस्ती में लन्ड पेल रहा था। मेरी गान्ड में अब दर्द तो नहीं हो रहा था.

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