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चंदा को कुछ भी परेशानी नही हुई. फिर तो चंदा सारा वीर्य निगल गयी. निगलने के बाद मुंह में बचे बाकी वीर्य का स्वाद और उसकी खुशबु उसे बहुत अच्छे लग रहे थे और उसे उत्तेजित भी कर रहें थे. फिर उसने अपने हाँथ में बचे वीर्य को भी सूंघना, चाटना और पीना शुरू कर दिया. सारी उँगलियों को चाट चाट के साफ़ करने के बाद उसने महेश के लंड को भी चाट चाट के साफ़ किया.

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