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. . हां . . . उतार दो . . . और सुनो क्या तुम मेरी कमर दबा सकती हो . . . ?” उसने मुझे पटाने की एक कोशिश की। मेरा दिल उछल पड़ा। मुझे इसी का तो इन्तज़ार था। मैंने शरमा कर कहा,”जी . . . दबा दूंगी . . . !”

मुझे कोशिश करके आज ही उसे जाल में फांस लेना था और अपनी चूत की प्यास बुझा लेनी थी। आखिर मैं कब तक तड़पती, जब कि विनय भी उसी आग में तड़प रहा था।

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