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मेरी आंखें उसकी आंखों से मिल गई . . . मैं होश खोने लगी . . . अचानक मेरी चूंचियो पर उसके हाथ का दबाव महसूस हुआ . . . वो दब चुकी थी . . . मैं सिमट गई,”सर प्लीज . . . ! नहीं . . . मैं मर जाऊंगी . . . ! ”

विनय ने तकिये के नीचे से एक पांच सौ का एक पत्ता मेरी चोली में घुसा दिया। पांच सौ रुपये मेरे लिये बड़ी रकम थी .

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