. . तूने तो मुझे खुश कर दिया है आज . . . !”
धचक धचक लण्ड घुसता रहा . . . मेरी गाण्ड चुदती रही . . . आज मेरी गाण्ड को लण्ड का प्यारा प्यारा मजा मिल गया था। मैं विनय की अहसानमन्द हो चुकी थी। मैंने भी अब थोडी सी मन की करने की सोची . . . और कहा,”सर . . . आप कहे तो मैं अब आपको चोद दूँ . . . ?”
“कैसे .