About:

अब हम दोनों गाड़ी में अकेले थे, उसने मुझसे पूछा “क्या तुम गाड़ी चलाओगे?”

मैंने हाँ में सर हिला दिया। तब उसने मुझे अपनी गाड़ी की चाबी दी और बोली- चलो !

मैं पागल हो रहा था कि एक अनजान औरत बिना कुछ जाने मुझे अपने साथ रात में ले जाने को तैयार है, क्या मेरी किस्मत इतनी अच्छी है?

लेकिन शायद किस्मत नाम ही है अप्रत्याशित का !

मैं ड्राईवर सीट पर आ गया और वो अगली सीट पर ! मैं कार चलने लगा, उसने मेरे बालों में हाथ डाला और कहने लगी,”काफी घबराए हुए लग रहे हो !”

मैंने डर के कहा- नहीं तो ! मैं ठीक हूँ !

तो हंसते हुए बोली “ठीक है ! चिन्ता मत करो मैं तुम्हें खा नहीं जाऊँगी !”

मैंने सर हिला दिया और वो मुझे रास्ता बताने लगी।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*