शायद माहौल का असर था। पर आसिफ़ का इरादा कुछ और था। उसने बिना कुछ बोले मेरे पैरों को फ़ैलाया और ऊपर चढ़ गया। मैं जब तक कुछ समझूँ उसने मेरे चूत में अपना लण्ड ठांस दिया। दो धक्के में पूरा नौ इन्च भीतर। मैं दर्द से बिलबिला उठी- उईईई माँआँआआँ, छोड़ो मुझे प्लीज !
आज पहली बार चुदाते समय अम्मी याद आई और आँखों में आँसू आ गए।