कुछ देर हम बातें करते रहे फिर विजय से रहा नहीं गया…वो अटकते हुये कुछ कहने की कोशिश करने लगा । मै सब समझ रही थी। उसका लन्ड पज़ामे में से उठा हुआ साफ़ दिख रहा था। “मैं आपसे कुछ कहूं…… बुरा तो नहीं मानेंगी ना……” उसके कहने के अन्दाज़ से ही लग रहा था की अब वो मुझे पटाने की कोशिश करेगा…
“हां……हां… कहो… ऐसा क्या है…” वो कुछ और मेरे नजदीक आ गया।