रात के ११ बज रहे थे। मैं बिस्तर पर आकर लेट गयी और तौलिया खोल कर पास में रख लिया। टोप भी उतार दिया और नंगी हो कर सो गयी। चादर ऊपर तक ओढ़ ली। विजय भी सिर्फ़ तौलिया लपेटे हुये बाहर आया और सोफ़े पर लेट गया। मैने उसे बडी अदा से मुस्करा कर कहा,”बिस्तर बहुत बड़ा है, यहीं पर सो जाओ। ”
उसे तो शायद बुलावे का इन्तेज़ार ही था।