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“गुड…. लेकिन अपनी टाँगें थोड़ी चौड़ी फैलाओ… थोड़ी सी और चौड़ी…!” आँटी बोलीं तो मैंने अपनी टाँगें चौड़ी फैला दीं और अपना चेहरा तकिये पे टिका लिया। शेरू से चुदने की बेकरारी में मेरे पूरे जिस्म में मस्ती भरी लहरें दौड़ रही थीं और मेरी चूत में तो जैसे शोले दहक रहे थे। अपनी गाँड ऊँची उठाये और थरथराती रानें चौड़ी फैलाये हुए मैंने तकिये पे गाल टिका कर अपनी गर्दन मोड़ कर पीछे देखा तो शेरू अपना जबड़ा खोले खड़ा था और उसके कान सीधे खड़े थे।

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