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फ़िर ऊपर की तरफ़ उँगली को चलाते हुए रागिनी के जी-स्पॉट को खोजना शुरु किया, और तभी रागिनी का बदन हल्के से काँपा। मुझे अपने खोज में सफ़लता मिल गई थी। मैंने अपनी उँगली से चूत के भीतर उस जगह कुरेदना शुरु किया तो रागिनी मचलने लगी- आआआआआअह्ह्ह्ह्ह अंकल ! उउईईईमाँ. . . . इइइस्सस. . . . । अचानक वो छटपटाई और फ़िर एकदम से ढीली हो गई।

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