रागिनी हल्के से कुनमुनाई। मैंने एक जोर का ध्क्का लगाया और पुरा ८” लण्ड भीतर पेल दिया। रागिनी की आँख बन्द थी, “आआअह” मुँह से निकली, और उसने आँख खोल कर भरपुर नजरों से मुझे देखा। मैंने उसके कान में कहा- जब मैं चोदूँगा तो मुझे खूब गाली देना, मजा आएगा !
मैंने रागिनी से पूछा- बोलो मेरी बच्ची, चोदूँ तुम्हें?
और सानिया की देख उससे पूछा- दिखा साफ़-साफ़, नहीं तो एक बार फ़िर बाहर निकाल कर पेलूँ भीतर?
यह कहते हुए मैंने लण्ड बाहर खींचा और दुबारा से रागिनी की बुर में पेल दिया।