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मैं अपने होंठ उसके होंठों से रगड़े जा रही थी। तभी रूम की बेल बजी। रमेश अलग हो गया। मैने उसे देखा तो हंस पड़ी……… उसका हाल बेहाल हो रहा था… उसका लन्ड फ़ूल कर पैन्ट में जोर मार रहा था। रमेश ने कहा,”मैं जरा देख कर आता हूं……”

मैने दोनों हाथों को उठा कर एक भरपूर अंगड़ाई ली और बिस्तर पर लेट गयी। मैं अपनी चूंचियों से खेलने लगी।

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