”
मैने शरमा कर तकिये में चेहरा छिपा लिया। उसने मेरी सफ़ेद साड़ी और पेटीकोट खोल कर अलग कर दिया। फिर खुले हुए ब्लाउज़ को प्यार से उतार दिया। मैने अपना चेहरा अभी भी शरम से छिपा रखा था। अब मैं पूरी नंगी थी और रमेश भी पूरा नंगा था। वो धीरे से मेरी पीठ पर लेट गया। उसका भार मेरे ऊपर बढ गया। उसका कड़क लन्ड मेरी चूतड़ों पर रेन्गने लगा।